इन मामलों में संबंधित अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी बताई जा रही है। संभावित कार्रवाई में योजना से अस्पताल का पंजीकरण समाप्त करना यानी डी-इम्पैनलमेंट और जुर्माना लगाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम कार्रवाई और उसकी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
आठ जिलों के अस्पताल जांच के दायरे में
आयुष्मान भारत योजना में कथित गड़बड़ियों की जांच के दायरे में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों के अस्पताल शामिल हैं।
शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ अस्पतालों ने उपचार के लिए निर्धारित पैकेज के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया और मरीजों से अतिरिक्त रकम वसूली। इन शिकायतों के आधार पर संबंधित अस्पतालों के दस्तावेजों और उपचार संबंधी रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई।
ये है आयुष्मान भारत योजना
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित शर्तों के तहत कैशलेस इलाज उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत उपचार के लिए तय पैकेज के अनुसार अस्पतालों को भुगतान किया जाता है।
ऐसे में यदि किसी पात्र मरीज से योजना के अंतर्गत कवर किए गए इलाज के लिए अनुचित रूप से अतिरिक्त रकम ली जाती है या गलत पैकेज का इस्तेमाल होता है, तो यह जांच का विषय बनता है। हालांकि, प्रत्येक शिकायत में वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय होगी।
दो अस्पतालों को योजना से बाहर करने की अनुशंसा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आई शिकायतों के आधार पर दो अस्पतालों को योजना से बाहर करने की अनुशंसा की गई थी। संबंधित अस्पतालों में उपचार और पैकेज के इस्तेमाल से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
जिलास्तरीय जांच टीम की ओर से संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और अस्पतालों को योजना से निलंबित करने की अनुशंसा किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन अनुशंसाओं पर आगे क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
14 अस्पतालों की जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई पर नजर
17 में से 14 अस्पतालों की जांच पूरी होने के बाद अब संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच में मिली जानकारी के आधार पर विभाग को यह तय करना होगा कि किन अस्पतालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई जरूरी है।
मरीजों से अतिरिक्त वसूली की शिकायतें गंभीर हैं, क्योंकि योजना का उद्देश्य पात्र लोगों को आर्थिक बोझ के बिना निर्धारित उपचार उपलब्ध कराना है। ऐसे मामलों में जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक होने से योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर स्पष्टता आ सकती है।
आयुष्मान के पैकेज और भुगतान को लेकर अस्पतालों की शिकायतें भी
दूसरी ओर, निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं की ओर से आयुष्मान योजना के उपचार पैकेज और भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी शिकायतें उठाई जाती रही हैं। अस्पतालों का कहना है कि इलाज के बाद भुगतान मिलने में देरी होती है और कई पैकेज लंबे समय से संशोधित नहीं किए गए हैं।
इस तरह एक ओर मरीजों से कथित अतिरिक्त वसूली और गलत पैकेज के इस्तेमाल की शिकायतें जांच का विषय हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल भुगतान और पैकेज की दरों में संशोधन की मांग कर रहे हैं। दोनों मुद्दों पर पारदर्शी प्रक्रिया और समयबद्ध निर्णय मरीजों तथा स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल, 14 अस्पतालों की जांच पूरी होने के बाद संबंधित मामलों में कार्रवाई को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।
