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कांग्रेस भवन के नाम से 104.20 करोड़ की एंट्री, EOW चार्जशीट में बड़ा दावा

छत्तीसगढ़ कोल लेवी मामले में EOW की चार्जशीट और कांग्रेस भवन के नाम से दर्ज कथित वित्तीय प्रविष्टियों से जुड़ी खबर कोल लेवी मामले में कांग्रेस भवन के नाम से 104.20 करोड़ की एंट्री का दावा
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की पूरक चार्जशीट में कांग्रेस कार्यालय से जुड़ी कथित वित्तीय प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त डायरियों में अक्टूबर 2020 से जून 2022 के बीच ‘भवन’, ‘BHAWAN’ और ‘C PARTY’ के नाम से 32 प्रविष्टियां दर्ज मिलीं, जिनका कुल हिसाब 104.20 करोड़ रुपये बताया गया है। EOW का आरोप है कि कोयला परिवहन से कथित तौर पर वसूली गई रकम का एक हिस्सा रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंचाया गया। ये आरोप जांच एजेंसी की चार्जशीट पर आधारित हैं और इन पर अदालत में न्यायिक प्रक्रिया होनी है।

डायरियों में ‘भवन’ और ‘C PARTY’ के नाम से 32 प्रविष्टियां

EOW के मुताबिक, जब्त हस्तलिखित डायरियों में ‘C PARTY KO’, ‘C PARTY BHAWAN ME’, ‘BHAWAN MEIN JAMA’, ‘BHAWAN ME DIYE’ और ‘भवन में दिया गया’ जैसे शब्द दर्ज मिले। जांच एजेंसी ने इन प्रविष्टियों को कथित रकम के संग्रह, जमा और भुगतान से जोड़कर देखा है।

चार्जशीट में कहा गया है कि संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर ‘भवन’ का अर्थ रायपुर स्थित राजीव भवन बताया गया। एजेंसी का दावा है कि डायरी में दर्ज रकम और संबंधित लोगों के बयानों का मिलान किया गया। हालांकि, इन प्रविष्टियों का अंतिम अर्थ और कथित लेन-देन में संबंधित लोगों की भूमिका अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण का विषय है।

अलग-अलग तारीखों पर करोड़ों रुपये का हिसाब

चार्जशीट में कुछ तारीखों की प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 जनवरी 2022 को BS-09 के तहत 2 करोड़, 6 करोड़ और 2 करोड़ रुपये की प्रविष्टियां दर्ज थीं। इनका कुल योग 10 करोड़ रुपये होता है।

इसी तरह, 2 मार्च 2022 को BS-41 में 4 करोड़ और 2 करोड़ रुपये, 30 मार्च को BS-01 में 5 करोड़ रुपये तथा 6 मई को BS-02 में 8 करोड़ रुपये दर्ज होने की बात कही गई है। 7 जून 2022 को BS-02 में 8.70 करोड़ रुपये का हिसाब मिलने का भी उल्लेख है।

जांच एजेंसी इन प्रविष्टियों को कथित अवैध वसूली और रकम के आगे वितरण से जोड़ रही है। केवल डायरी में दर्ज रकम अपने आप में किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं करती; इसके लिए अन्य साक्ष्यों और न्यायिक परीक्षण की आवश्यकता होगी।

काले बैग में नकदी पहुंचाने के आरोप

EOW की चार्जशीट में कुछ गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि नकदी से भरे बैग राजीव भवन ले जाए जाते थे और देवेंद्र डडसेना के पास रखे जाते थे। चार्जशीट के अनुसार, डडसेना तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल के निजी सहायक के रूप में काम करता था और उनके कक्ष के पास बैठता था।

रिपोर्ट में रूपेंद्र यादव और सोहन साहू के बयानों का उल्लेख है। इनके मुताबिक, उन्होंने कार्यालय के बाईं ओर स्थित शटर के पास गाड़ियों से काले बैग उतरते और उन्हें डडसेना के कमरे में रखे जाते देखा था। रूपेंद्र यादव ने एक बार में करीब 8 से 10 बैग आने और कुछ मौकों पर उन्हें कमरे तक पहुंचाने में मदद करने की बात कही।

सोहन साहू के बयान में एक सफेद स्विफ्ट डिजायर कार और नंबर में ‘0009’ अंक होने का उल्लेख भी बताया गया है। चार्जशीट में अन्य कर्मचारियों के बयानों के आधार पर कार्यालय के एक हिस्से को बंद किए जाने और वहां मौजूद लोगों को हटाए जाने की बात भी दर्ज होने का दावा किया गया है। इन बयानों की सत्यता और उनका महत्व अदालत में जांचा जाएगा।

25 रुपये प्रति टन की कथित वसूली का आरोप

EOW के अनुसार, 15 जुलाई 2020 के एक आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी अनिवार्य हो गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी व्यवस्था का इस्तेमाल कोयला परिवहनकर्ताओं से 25 रुपये प्रति टन की कथित अवैध वसूली के लिए किया गया।

चार्जशीट में कहा गया है कि विभिन्न जिलों से रकम रायपुर पहुंचाई जाती थी और उसके संग्रह तथा वितरण का हिसाब रखा जाता था। एजेंसी ने इस कथित नेटवर्क में कारोबारियों, बिचौलियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की है। कोल लेवी मामले में कुल कथित वसूली को लेकर पहले भी जांच एजेंसियां बड़े वित्तीय आंकड़े सामने रख चुकी हैं।

‘सीएम हाउस’ के नाम से विश्राम गृहों की बुकिंग का दावा

चार्जशीट में कथित तौर पर जब्त मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है। EOW का दावा है कि 15 जुलाई 2020 के आदेश से संबंधित डिजिटल सामग्री जांच में सामने आई। एजेंसी के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी और उनके सहयोगी कोयला उत्पादक जिलों में बैठकें करते थे तथा कुछ विश्राम गृहों में ‘सीएम हाउस’ के नाम से बुकिंग कराए जाने के रिकॉर्ड भी मिले।

इसके अलावा, बालको और अंबुजा से जुड़े पत्रों को भी जांच सामग्री में शामिल किए जाने की बात कही गई है। EOW के अनुसार, इनमें से एक पत्र में परिवहन बिलों में 25 रुपये प्रति टन जोड़ने का उल्लेख था। इन दस्तावेजों का संदर्भ और उनसे निकलने वाले निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया में परखे जाएंगे।

जमीन, फ्लैट और वाशरी में निवेश की जांच

EOW ने कथित कोल लेवी से प्राप्त रकम को जमीन, फ्लैट, वाशरी और दूसरी संपत्तियों में निवेश किए जाने की भी जांच की है। चार्जशीट में पियूष कुमार साहू, अनुराग चौरसिया, जोगेन्दर सिंह, सुनील कुमार अग्रवाल और दीपेश टांक से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन का उल्लेख किया गया है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, जोगेन्दर सिंह से जुड़ी सात फर्मों में करीब 40 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन का विवरण शामिल है। अन्य मामलों में संपत्ति खरीद, नकदी के भुगतान और वाशरी में निवेश से संबंधित लेन-देन की जांच किए जाने की बात कही गई है।

एजेंसी का आरोप है कि कुछ संपत्तियों में कथित अवैध रकम का निवेश किया गया। हालांकि, किसी संपत्ति या वित्तीय लेन-देन का उल्लेख चार्जशीट में होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है।

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