रायपुर कमिश्नरेट और ग्रामीण थाना क्षेत्रों में शनिवार से रविवार के बीच 24 घंटे में गुमशुदगी के 159 मामले दर्ज किए गए। इनमें 78 महिलाएं, 54 वयस्क पुरुष, 17 बच्चे और नाबालिग तथा 10 बुजुर्ग शामिल हैं। पुलिस अब सामान्य गुमशुदगी की जांच के साथ इस पहलू पर भी नजर रख रही है कि कहीं किसी व्यक्ति को बंधक बनाकर तो नहीं रखा गया या उसे अवैध तरीके से छिपाया गया है।
पुलिस के अनुसार, प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर जांच की जा रही है। लापता लोगों की तलाश के दौरान उनके मोबाइल फोन, संपर्कों और आखिरी लोकेशन जैसी जानकारियों को भी खंगाला जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जांच का तरीका बदला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गुमशुदगी से जुड़े मामलों में केवल व्यक्ति की तलाश तक जांच सीमित नहीं रखी जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि लापता होने के पीछे कोई आपराधिक घटना तो नहीं है।
डीसीपी तारकेश्वर पटेल के मुताबिक, सभी गुम प्रकरणों में अपराध दर्ज कर जांच की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मामलों की गंभीरता और परिस्थितियों के अनुसार पुलिस अलग-अलग एंगल से पड़ताल कर रही है।
पारिवारिक विवाद से लेकर आर्थिक परेशानी तक कारण
पुलिस के अनुसार, गुमशुदगी के पीछे कई तरह के कारण सामने आ सकते हैं। इनमें पारिवारिक विवाद, पति-पत्नी के बीच अनबन, प्रेम संबंध, आर्थिक परेशानी, बेरोजगारी, नशे की लत, संपत्ति विवाद और घरेलू हिंसा शामिल हैं।
किशोरों और नाबालिगों से जुड़े मामलों में पढ़ाई का दबाव और प्रेम संबंध भी गुम होने की वजह हो सकते हैं। इसलिए पुलिस हर मामले में लापता व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक स्थिति और आखिरी गतिविधियों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
शादी के अगले दिन दुल्हन लापता
गोलबाजार थाना क्षेत्र में शादी के अगले ही दिन 25 वर्षीय नवविवाहिता के लापता होने का मामला सामने आया है। पुलिस इस मामले में भी महिला की तलाश और उसके लापता होने की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
इसी तरह आमानाका क्षेत्र से एक ट्रक के खलासी के लापता होने की शिकायत दर्ज हुई है। माना कैंप स्थित वरिष्ठजन आश्रम से 72 वर्षीय बुजुर्ग के गायब होने और इलाज के लिए अस्पताल लाई गई 43 वर्षीय महिला के लापता होने का मामला भी दर्ज किया गया है।
मोबाइल और आखिरी लोकेशन से तलाश
पुलिस के मुताबिक, गुमशुदगी के मामलों में लापता व्यक्ति के मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, संपर्क में रहे लोगों और आखिरी लोकेशन जैसी जानकारियों की जांच की जा रही है।
गंभीर या संदिग्ध परिस्थितियों वाले मामलों में यह भी पता लगाया जा रहा है कि व्यक्ति के साथ कोई अपराध तो नहीं हुआ। जरूरत के अनुसार पुलिस संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
थानों में दर्ज हुए गुमशुदगी के मामले
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रायपुर के कई थाना क्षेत्रों में गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें उरला, मुजगहन, गुढ़ियारी, खमतराई, टिकरापारा, डीडी नगर, पंडरी और आमानाका जैसे थाना क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा खरोरा, तिल्दा नेवरा, अभनपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद, सिलतरा, आरंग, गोबरा नवापारा, माना, विधानसभा और राखी थाना क्षेत्रों में भी गुमशुदगी के प्रकरण दर्ज हुए हैं।
अब पुलिस के सामने लापता लोगों को तलाशने की चुनौती
एक ही दिन में बड़ी संख्या में गुमशुदगी के मामले दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने लापता लोगों को जल्द तलाशने की चुनौती है। पुलिस का कहना है कि हर मामले को उसकी परिस्थितियों के अनुसार देखा जा रहा है और गंभीर मामलों में अपराध की आशंका समेत सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बदली हुई जांच प्रक्रिया और तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस इन गुमशुदगी के मामलों में लापता लोगों तक कितनी जल्दी पहुंच पाती है।
