मध्य प्रदेश के शिवपुरी में गांधी पेट्रोल पंप की जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई को लेकर नगर पालिका और प्रशासन के बीच विवाद सामने आया है। नगर पालिका की टीम हिटाची मशीन लेकर कार्रवाई के लिए पहुंची थी, लेकिन मौके पर नगर पालिका के ही कुछ कर्मचारियों ने मशीन के सामने आकर विरोध शुरू कर दिया। इसके चलते कार्रवाई रोकनी पड़ी।
मौके पर हंगामे और नारेबाजी के बाद सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा भी मौके पर पहुंचीं और उन्होंने नियमानुसार कार्रवाई नहीं होने देने पर धरने पर बैठने की चेतावनी दी। पूरे मामले को लेकर नगर पालिका और प्रशासन के बीच मतभेद सामने आए हैं।
13,600 वर्ग फीट जमीन को लेकर 42 साल से विवाद
विवाद शिवपुरी के झांसी तिराहा स्थित गांधी पेट्रोल पंप की करीब 13,600 वर्ग फीट जमीन से जुड़ा है। नगर पालिका और संबंधित पक्ष के बीच इस जमीन को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने 1 सितंबर 2026 को Second Appeal No. 18/2003 में नगर पालिका परिषद शिवपुरी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को निरस्त करते हुए संबंधित पक्ष का मुकदमा खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट के फैसले में ये कहा गया
हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक, जमीन 25 साल की लीज के लिए दी गई थी और नगर पालिका का पक्ष था कि लीज की अवधि 3 नवंबर 1984 को समाप्त हो गई थी। संबंधित पक्ष ने लीज के नवीनीकरण का दावा किया था।
अदालत ने माना कि केवल नवीनीकरण के लिए आवेदन करने या कुछ राशि जमा करने से लीज अपने आप नवीनीकृत नहीं हो जाती। फैसले में जमीन को अन्य व्यक्तियों, जिसमें सुधीर ऑटोमोबाइल्स भी शामिल है, को सब-लीज/कब्जा दिए जाने से संबंधित साक्ष्यों पर भी विचार किया गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले और डिक्री को निरस्त कर दिया।
फैसले के बाद नपा ने जारी किया नोटिस
हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर पालिका की ओर से 22 सितंबर 2026 को अंतिम सूचना जारी कर 10 दिन के भीतर स्वेच्छा से कब्जा छोड़ने के लिए कहा गया था। यह अवधि 2 अक्टूबर को समाप्त होने के बाद नगर पालिका ने जमीन का कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की।
इसी कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों के विरोध के कारण मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
नपाध्यक्ष ने CMO पर लगाए आरोप
नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने CMO यशवंत राठौर पर आरोप लगाया कि गलत तरीके से 10 दिन का नोटिस देकर पेट्रोल पंप संचालक को आगे कानूनी राहत लेने का समय दिया जा रहा है।
हालांकि, CMO यशवंत राठौर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बेदखली की कार्रवाई नियम और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही है। यह दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं।
प्रशासन से भी नाराजगी जताई
नपाध्यक्ष के अनुसार, 4 अक्टूबर को जमीन पर पजेशन की कार्रवाई को लेकर उन्होंने CMO यशवंत राठौर और कलेक्टर अर्पित वर्मा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके फोन का जवाब नहीं मिला।
नपाध्यक्ष ने कार्रवाई में बाधा आने पर धरने पर बैठने की चेतावनी भी दी। हंगामे के दौरान सड़क पर जाम लगने की बात भी सामने आई है।
पेट्रोल पंप संचालक ने कहा- कानून के मुताबिक चलेंगे
गांधी पेट्रोल पंप के संचालक समीर गांधी ने कहा कि उन्होंने मामले में कानून का पालन किया है और नगर पालिका को भी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। उनका कहना है कि मामला न्यायालय में है, इसलिए इस पर वह ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते।
1960 में दी गई थी जमीन की लीज
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, विवादित जमीन को 23 जुलाई 1960 को भारत पेट्रोलियम के लिए मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स को 25 साल के लिए लीज पर दिया गया था। लीज के लिए प्रीमियम 4,472 रुपये और सालाना किराया 279.50 रुपये निर्धारित था।
हाईकोर्ट के फैसले में भी लीज की अवधि और उसके बाद जमीन पर कब्जे को लेकर पक्षों के दावों पर विस्तार से विचार किया गया है। अदालत ने नगर पालिका की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालतों के फैसले रद्द कर दिए।
अब आगे ये होगा
हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर पालिका जमीन का कब्जा लेने की कार्रवाई आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि पेट्रोल पंप संचालक की ओर से कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया गया है।
फिलहाल विवाद का ताजा केंद्र जमीन का कब्जा लेने की कार्रवाई और नगर पालिका के भीतर सामने आए मतभेद हैं। आगे प्रशासन और नगर पालिका की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि जमीन का वास्तविक पजेशन कब लिया जाता है।
