पहली घटना में महिला और बेटे की मौत
जानकारी के अनुसार, बुधवार को शिवपुरी के बैराड़ थाना क्षेत्र के गुंगरगांव में 35 वर्षीय अंजली रावत ने अपने बच्चों के साथ कुएं में छलांग लगा दी। बताया गया कि उन्होंने अपनी तीन बेटियों को कुएं में धकेल दिया और इसके बाद छह वर्षीय बेटे प्रशांत के साथ खुद भी कुएं में कूद गईं।
इस दौरान अंजली की बड़ी बेटी मोनिका किसी तरह खुद को और अपनी दो छोटी बहनों को बचाने में सफल रही। वह तुरंत घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और बचाव की कोशिश की।
परिजनों ने काफी मशक्कत के बाद अंजली और उनके बेटे को कुएं से बाहर निकाला, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अंजली के पति धर्मवीर रावत की करीब डेढ़ महीने पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। परिजनों का कहना है कि पति की मृत्यु के बाद से वह मानसिक तनाव में थीं।
दूसरी घटना में गर्भवती महिला और तीन बच्चों की मौत
पहली घटना के बाद सामने आई दूसरी घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, अंजली की 40 वर्षीय सगी बहन सीता रावत बुधवार को अपने तीन बच्चों राखी (14), प्रियंका (11) और श्लोक (6) के साथ खोनकर गांव के एक खेत की ओर गई थीं।
शाम करीब छह बजे तक उनके घर नहीं लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान उन्हें कुएं के पास चप्पलें दिखाई दीं। पानी में एक बच्चे का शव नजर आने के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी।
रात करीब 11 बजे कुएं से निकाले गए शव
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। रात करीब 11 बजे रेस्क्यू अभियान चलाकर सीता रावत और उनके तीनों बच्चों के शव कुएं से बाहर निकाले गए।
पुलिस के मुताबिक, सीता आठ महीने की गर्भवती थीं। इस घटना में उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई। इस तरह दोनों घटनाओं में दो महिलाओं और चार बच्चों समेत छह लोगों की जान चली गई, जबकि सीता के गर्भस्थ शिशु की मौत भी हुई।
दोनों बहनों के बीच था गहरा रिश्ता
परिजनों और रिश्तेदारों के अनुसार, अंजली और सीता के बीच गहरा लगाव था। दोनों बहनें एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहती थीं। रिश्तेदारों ने आशंका जताई है कि अंजली की मौत के बाद सीता गहरे सदमे में थीं।
हालांकि, दूसरी घटना के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर लिया है और घटनाओं से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। मौतों के कारणों और घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
