आज 5 अक्टूबर 2026, सोमवार को विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 है। पंचांग के अनुसार आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। आज दशमी का श्राद्ध बताया गया है। दशमी तिथि 6 अक्टूबर की रात 2:07 बजे तक रहेगी, इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी।
आज पुष्य नक्षत्र रात 11:09 बजे तक रहेगा और इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा। वहीं शिव योग सुबह 9:51 बजे तक है, जिसके बाद सिद्ध योग रहेगा।
5 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- दिन: सोमवार
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद
- मास: आश्विन
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: दशमी, 6 अक्टूबर रात 2:07 बजे तक; इसके बाद एकादशी
- नक्षत्र: पुष्य, रात 11:09 बजे तक; इसके बाद अश्लेषा
- योग: शिव, सुबह 9:51 बजे तक; इसके बाद सिद्ध
- राहुकाल: सुबह 8:00 से 9:29 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 6:32 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:21 बजे
- दिशाशूल: पूर्व दिशा
- व्रत/पर्व: दशमी श्राद्ध
एकादशी तिथि कब शुरू होगी
पंचांग के अनुसार दशमी तिथि 6 अक्टूबर की मध्यरात्रि 2:07 बजे समाप्त होगी और इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी। दी गई जानकारी के अनुसार एकादशी तिथि 6 अक्टूबर की रात 12:34 बजे तक रहेगी।
पंचांग में 6 अक्टूबर, मंगलवार को एकादशी व्रत रखने का उल्लेख किया गया है। एकादशी व्रत को लेकर हिंदू धार्मिक परंपराओं में भगवान विष्णु की आराधना और उपवास का विशेष महत्व माना जाता है।
एकादशी व्रत को लेकर क्या मान्यता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा मिलने की मान्यता है। धार्मिक ग्रंथों और कथाओं में एकादशी व्रत को पुण्यदायी बताया गया है।
परंपरागत मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत से परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इन्हें आस्था के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
एकादशी के दिन क्या करें
धार्मिक परंपरा के अनुसार एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप किया जाता है। दिए गए पंचांग में विष्णु सहस्रनाम के पाठ की सलाह दी गई है। यदि विष्णु सहस्रनाम का पाठ संभव न हो तो गुरु मंत्र का जाप करने की बात कही गई है।
मान्यता के अनुसार, इस दिन दीप जलाकर भगवान विष्णु की आराधना करने से भक्त को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
एकादशी पर चावल न खाने की मान्यता
एकादशी व्रत को लेकर कुछ धार्मिक परंपराओं में चावल का सेवन न करने की मान्यता भी है। दिए गए धार्मिक संदर्भ में वृद्ध, बच्चे या बीमार व्यक्ति यदि उपवास नहीं रख सकते हैं, तो भी एकादशी के दिन चावल का त्याग करने की बात कही गई है।
यह धार्मिक मान्यता है, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में भोजन या उपवास को लेकर व्यक्तिगत जरूरतों को प्राथमिकता देना उचित है।
चतुर्मास में इन बातों का रखें ध्यान
पंचांग में स्कंद पुराण के संदर्भ से चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के पात्रों के बजाय अन्य धातुओं के पात्रों के इस्तेमाल की बात कही गई है।
इसी तरह चतुर्मास में पलाश के पत्तों से बनी पत्तल पर भोजन करने को धार्मिक रूप से पापनाशक माना गया है। ये बातें धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं।
आज दशमी श्राद्ध
5 अक्टूबर को दशमी तिथि होने के कारण आज दशमी श्राद्ध का उल्लेख पंचांग में किया गया है। हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। अलग-अलग परंपराओं में श्राद्ध से जुड़े नियम और विधियां अलग हो सकती हैं।
आज के दिन किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या श्राद्ध कर्म के लिए स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार समय व विधि का पालन किया जा सकता है।
