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रायपुर में शिक्षक को 3 दिन किया डिजिटल अरेस्ट, ATS-NIA अफसर बनकर ठगे 18 लाख रुपये

रायपुर में ATS और NIA अधिकारी बनकर शिक्षक से 18 लाख रुपये की साइबर ठगी रायपुर में शिक्षक से 18 लाख की डिजिटल अरेस्ट ठगी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 60 वर्षीय शिक्षक से 18 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। सड्डू निवासी शिक्षक को साइबर ठगों ने खुद को ATS, NIA और पुलिस का अधिकारी बताकर करीब तीन दिन तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा। आरोपियों ने शिक्षक के आधार नंबर से जम्मू-कश्मीर में बैंक खाता खुलने और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में इस्तेमाल होने की बात कहकर गिरफ्तारी का डर दिखाया।

ठगों ने जांच के नाम पर शिक्षक से पहले परिवार, बैंक खातों और संपत्ति की जानकारी हासिल की और बाद में उनकी एफडी तुड़वाकर 18 लाख रुपये RTGS करा लिए। रकम ट्रांसफर होने के बाद भी आरोपियों ने बैंक पासबुक अपडेट करवाकर उसकी फोटो WhatsApp पर मंगाई। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने रेंज साइबर थाने में शिकायत की, जिसके आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

24 सितंबर को आया था पहला फोन

सड्डू के सेक्टर-6 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी शिक्षक अखिलेश कुमार मिश्र (60) के मुताबिक, 24 सितंबर को स्कूल से लौटने के बाद दोपहर करीब 1 बजे उनके मोबाइल पर फोन आया।

फोन करने वाले ने खुद को नया रायपुर ATS कार्यालय का वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बताया। उसने दावा किया कि शिक्षक के आधार नंबर से जम्मू-कश्मीर में एक बैंक खाता खोला गया है और उसमें मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी गतिविधियां सामने आई हैं। इसके साथ ही लखनऊ ATS से उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही गई।

शिक्षक ने तत्काल कार्यालय पहुंचने में असमर्थता जताई तो कथित अधिकारी ने किसी दूसरे व्यक्ति से बात कराई। उसने भी वही कहानी दोहराते हुए शिक्षक को जांच में सहयोग करने के लिए कहा।

पुलिस की वर्दी में युवक ने वीडियो कॉल पर की पूछताछ

कुछ देर बाद शिक्षक के WhatsApp पर वीडियो कॉल आया। कॉल में पुलिस की वर्दी पहने करीब 25 से 30 साल का एक युवक दिखाई दिया। कुछ देर बाद उसने अपना वीडियो बंद कर दिया, जबकि शिक्षक से कैमरा चालू रखने को कहा गया।

इसके बाद कथित अधिकारियों ने शिक्षक से उनके परिवार के बारे में जानकारी लेना शुरू किया। बच्चों के रहने और काम करने से लेकर उनकी शादी तक की जानकारी पूछी गई। इसके बाद बैंक खातों, FD, वाहन और दूसरी संपत्तियों से संबंधित जानकारी भी हासिल की गई। शिक्षक ने पुलिस को बताया कि उन्होंने आरोपियों के कहने पर परिवार और संपत्ति से जुड़ी कई जानकारियां साझा कर दीं।

कथित NIA अधिकारी से भी कराई बात

ठगों ने अगले दिन शिक्षक की कथित IG विक्रम सिंह से बात कराई। इसके बाद उन्हें कथित NIA अधिकारी राकेश अग्रवाल से बात कराई गई।

आरोपियों ने शिक्षक को बताया कि उनके नाम मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है और गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। शिक्षक ने अपने बचाव में कहा कि वह कभी जम्मू-कश्मीर नहीं गए और वहां उनका कोई बैंक खाता नहीं है।

इसके बावजूद कथित अधिकारियों ने उन्हें जांच में सहयोग करने और उनके निर्देशों का पालन करने के लिए कहा। इसके बाद शिक्षक से उनकी चल संपत्ति की रकम RTGS के माध्यम से जमा कराने को कहा गया।

‘नॉट इन्वॉल्वमेंट सर्टिफिकेट’ का झांसा

ठगों ने शिक्षक को कथित तौर पर बताया कि रकम जमा करने के बाद NIA कोर्ट से नॉट इन्वॉल्वमेंट सर्टिफिकेट (NIC) मिलेगा। इसके बाद RBI उनकी संपत्ति की जांच करेगा और यह प्रमाणित करेगा कि रकम वैध है।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से शिक्षक आरोपियों के झांसे में आ गए। 25 सितंबर को उन्होंने बैंक की पंडरी शाखा जाकर FD तुड़वाई और रकम अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कराई। अगले दिन बारिश के कारण वह बैंक नहीं पहुंच सके और RTGS नहीं हो पाया।

27 सितंबर को 18 लाख रुपये RTGS कराए

शिक्षक के अनुसार, 27 सितंबर को उन्होंने कथित ठगों के बताए IDFC First Bank के खाते में 18 लाख रुपये RTGS कर दिए। FIR में जिस खाते का उल्लेख है, वह ‘JAMKA VALVE’ नाम से दर्ज बताया गया है।

रकम ट्रांसफर करने के बाद शिक्षक ने WhatsApp पर आरोपियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ठगों ने ट्रांजैक्शन की पुष्टि के लिए बैंक की जमा पर्ची मांगी। पर्ची उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने शिक्षक से पासबुक अपडेट करवाकर उसकी फोटो भेजने को कहा।

शिक्षक ने पासबुक अपडेट कर उसकी तस्वीर भी WhatsApp पर भेज दी। उसी दिन शाम करीब 4:30 बजे आरोपियों ने उन्हें RBI का कथित प्रमाणपत्र भी भेजा।

रेंज साइबर थाना कर रहा जांच

ठगी का अहसास होने के बाद शिक्षक ने रेंज साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस कथित आरोपियों के मोबाइल नंबर, WhatsApp बातचीत, बैंक खाते, RTGS ट्रांजैक्शन और भेजे गए दस्तावेजों की जांच कर रही है।

पुलिस की जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि 18 लाख रुपये जिस खाते में भेजे गए, उसका इस्तेमाल साइबर ठगी के नेटवर्क में किस तरह किया गया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

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