ये तस्वीरें NASA के क्यूरियोसिटी रोवर ने 11 अगस्त 2026 को मंगल ग्रह के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:30 बजे ली थीं। एजेंसी ने इन्हें 6 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक किया। तस्वीरें मंगल ग्रह पर रोवर के मिशन के 4,982वें दिन ली गई थीं।
छह तस्वीरों को जोड़कर तैयार किया गया पैनोरमा
NASA के मुताबिक, मंगल ग्रह के इस दृश्य को क्यूरियोसिटी रोवर के Mastcam कैमरे ने कैद किया। कुल छह तस्वीरों को पृथ्वी पर भेजे जाने के बाद जोड़कर एक विस्तृत पैनोरमा तैयार किया गया।
इस तस्वीर की खास बात इसका रंग संयोजन है। NASA ने इसे सामान्य तस्वीरों की तरह व्हाइट बैलेंसिंग किए बिना प्रोसेस किया। व्हाइट बैलेंसिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें तस्वीर के रंगों को रोशनी के अनुसार समायोजित किया जाता है। इसे लागू नहीं करने से मंगल ग्रह पर सुबह के समय दिखाई देने वाली रोशनी और रंगों का अलग रूप सामने आया है।
मंगल की सतह पर दिखीं हवा से तराशी गई चट्टानें
तस्वीर में दूर दिखाई देने वाली नुकीली चट्टानी संरचनाओं को यार्डैंग्स (Yardangs) कहा जाता है। ये ऐसी चट्टानी आकृतियां हैं, जिन्हें लंबे समय तक चलने वाली हवा और उसके साथ उड़ने वाले कणों के कटाव ने आकार दिया है।
NASA के अनुसार, ये संरचनाएं माउंट शार्प के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में लगभग 16 किलोमीटर तक फैली हुई हैं। माउंट शार्प करीब 5 किलोमीटर ऊंचा पर्वत है, जिस पर क्यूरियोसिटी रोवर वर्ष 2014 से चढ़ाई करते हुए अध्ययन कर रहा है।
वैज्ञानिक अब भी तलाश रहे हैं चट्टानों की उत्पत्ति
यार्डैंग्स की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिक अभी निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। एक संभावना यह है कि इन चट्टानों को बनाने वाली सामग्री प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोटों से निकली राख हो सकती है। हालांकि, यह अभी एक परिकल्पना है, जिसकी पुष्टि के लिए आगे अध्ययन की जरूरत है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन संरचनाओं का नजदीक से अध्ययन करने पर मंगल ग्रह के भूवैज्ञानिक इतिहास और वहां हुए पर्यावरणीय बदलावों के बारे में नई जानकारी मिल सकती है। NASA की योजना के अनुसार, क्यूरियोसिटी रोवर 2027 के दौरान यार्डैंग्स की परत के आधार तक पहुंचने का प्रयास कर सकता है।
2012 से मंगल ग्रह की खोज कर रहा है क्यूरियोसिटी रोवर
NASA का क्यूरियोसिटी रोवर अगस्त 2012 में मंगल ग्रह के गेल क्रेटर में उतरा था। इसका प्रमुख उद्देश्य मंगल की चट्टानों, मिट्टी और जलवायु का अध्ययन करना है, ताकि यह समझा जा सके कि क्या अतीत में वहां सूक्ष्मजीवों के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं।
माउंट शार्प की अलग-अलग चट्टानी परतों का अध्ययन करके वैज्ञानिक मंगल ग्रह के पुराने पर्यावरण और जल इतिहास के संकेत तलाश रहे हैं। इन परतों से पता चलता है कि अरबों वर्ष पहले इस क्षेत्र में झीलें और जलधाराएं मौजूद थीं, जो समय के साथ सूख गईं।
सूर्योदय की नई तस्वीरें न केवल मंगल ग्रह की खूबसूरती को सामने लाती हैं, बल्कि वहां मौजूद रहस्यमयी भूवैज्ञानिक संरचनाओं को समझने का अवसर भी देती हैं। आने वाले समय में इन चट्टानों का प्रत्यक्ष अध्ययन मंगल ग्रह के इतिहास से जुड़े कई सवालों के जवाब खोजने में मदद कर सकता है।
