बिहार में गंडक नदी की बाढ़ का असर अब अंतरिक्ष से ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में भी साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA की Earth Observatory ने 2 अक्टूबर 2026 को ‘Rains Swamp the Gandak River’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें गंडक नदी के आसपास बाढ़ से बदले हालात की तस्वीरें दिखाई गई हैं।
NASA के अनुसार, नेपाल के पहाड़ी लुंबिनी और गंडकी क्षेत्रों में 24 से 27 सितंबर के बीच हुई लगातार भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुए और गंडक नदी का जलस्तर नेपाल तथा भारत के कुछ हिस्सों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।
Terra और Aqua सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें
NASA ने Terra और Aqua सैटेलाइट के MODIS उपकरण से ली गई तस्वीरों के जरिए बाढ़ की स्थिति का आकलन किया है। रिपोर्ट में 20 सितंबर और 29 सितंबर 2026 की तस्वीरों की तुलना की गई है।
इन तस्वीरों में बाढ़ के दौरान गंडक नदी का फैलाव काफी अधिक दिखाई देता है। NASA के मुताबिक, कई स्थानों पर बाढ़ का पानी तटबंधों के ऊपर से बहा और कुछ जगह तटबंध टूटने के कारण आसपास के खेतों और बस्तियों में पानी फैल गया।
नेपाल की बारिश से बढ़ा गंडक का जलस्तर
NASA की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में हुई भारी बारिश का सीधा असर गंडक नदी के जलस्तर पर पड़ा। नदी को नेपाल में नारायणी नदी के नाम से भी जाना जाता है।
नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 27 सितंबर को देवघाट में गंडक का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंच गया। NASA ने इसे वहां 1960 के दशक में माप शुरू होने के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया है।
बिहार के कई जिलों में बाढ़ का असर
गंडक नदी के उफान का असर बिहार के कई जिलों में देखा गया। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में बाढ़ का पानी पहुंचने से बड़ी संख्या में गांव और निचले इलाके प्रभावित हुए।
बिहार में बगहा गेज स्टेशन पर भी गंडक ने नया रिकॉर्ड बनाया। 29 सितंबर को यहां जलस्तर 91.25 मीटर दर्ज किया गया, जिसे बिहार जल संसाधन विभाग ने अब तक का सर्वाधिक स्तर बताया।
विजय कुमार चौधरी ने NASA रिपोर्ट का दिया हवाला
बिहार के उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन विभाग के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने NASA की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल में हुई असाधारण बारिश के बाद गंडक का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा।
उन्होंने 20 और 29 सितंबर की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे गंडक के आसपास बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र के विस्तार को समझने में मदद मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि कई स्थानों पर तटबंधों के ऊपर से पानी बहा और कुछ जगह तटबंधों में टूट हुई।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर से राहत
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान भी जारी है। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने सारण जिले के दुर्गम इलाकों में 5,600 से अधिक सूखे राशन के पैकेट गिराए। इन पैकेटों में करीब 28 टन खाद्य सामग्री थी।
राज्य सरकार के अनुसार, राहत अभियान में केंद्र के गृह और रक्षा मंत्रालयों के समन्वय से वायुसेना के हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से बाढ़ के आकलन में मदद
NASA की रिपोर्ट में बताया गया है कि सैटेलाइट डेटा बाढ़ के फैलाव को बड़े क्षेत्र में समझने और प्रभावित इलाकों की पहचान करने में उपयोगी हो सकता है। NASA ने बाढ़ और बारिश की निगरानी के लिए Worldview, FLOOD Viewer और GPM IMERG जैसे अन्य डेटा टूल्स का भी उल्लेख किया है।
