नई नियमावली के लागू होने से राज्य में न्यूनतम वेतन और वेतन भुगतान से संबंधित प्रावधानों को नए कानूनी ढांचे के तहत व्यवस्थित किया गया है। इसके साथ ही न्यूनतम वेतन (छत्तीसगढ़) नियम, 1958 और छत्तीसगढ़ वेतन भुगतान नियम, 1962 का स्थान अब नए नियमों ने ले लिया है।
अप्रैल में जारी किया गया था नियमों का प्रारूप
श्रम विभाग ने मजदूरी संहिता के नियमों का प्रारूप 13 अप्रैल 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया था। इसके बाद आम नागरिकों, श्रमिक संगठनों, नियोक्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों से 45 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए थे।
विभाग को प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद 28 अक्टूबर को अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई।
न्यूनतम वेतन और भुगतान से जुड़े प्रावधान शामिल
मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम, 2026 के तहत वेतन निर्धारण, न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान, बोनस और श्रमिकों से जुड़े अन्य वैधानिक प्रावधानों के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर नियम निर्धारित किए गए हैं।
इस नई व्यवस्था से श्रमिकों के वेतन संबंधी अधिकारों के संरक्षण और नियोक्ताओं की कानूनी जिम्मेदारियों के अनुपालन को व्यवस्थित आधार मिलेगा।
श्रमिकों के वेतन अधिकारों को मिलेगा कानूनी संरक्षण
राज्य शासन के अनुसार, नई मजदूरी संहिता का उद्देश्य वेतन संबंधी व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करना और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही नियोक्ताओं के लिए निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का पालन करना भी जरूरी होगा।
नई नियमावली को छत्तीसगढ़ में पारदर्शी श्रम व्यवस्था और वेतन संबंधी अधिकारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
