रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में छात्रों के परीक्षा परिणामों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर NSUI ने प्रदर्शन किया। सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ संगठन ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का घेराव कर परीक्षा मूल्यांकन में पारदर्शिता, उत्तरपुस्तिकाओं की दोबारा जांच और परीक्षा से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग उठाई। छात्र प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया है।
प्रदर्शन के दौरान NSUI के PRSU अध्यक्ष पुनेश्वर लहरे ने कुलसचिव कपिल देव के सामने छात्रों की समस्याएं रखीं। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर सवाल उठाए और संबंधित कागज फाड़ दिया। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कुलसचिव के सामने उठाया पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान पुनेश्वर लहरे ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ मजाक नहीं होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए तीन पेपर लीक होने का दावा किया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि आगे गलती हुई तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ छात्र विरोध करेंगे।
छात्रों का आरोप है कि परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ियों और मूल्यांकन को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से उनकी परेशानियां बढ़ रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से परीक्षा संबंधी आंकड़ों और परिणामों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
B.Sc. कृषि के रिजल्ट की दोबारा जांच की मांग
NSUI ने B.Sc. कृषि के स्नातक पाठ्यक्रम के परीक्षा परिणामों पर सवाल उठाते हुए प्रभावित विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं की निष्पक्ष दोबारा जांच कराने की मांग की है। छात्र नेताओं का कहना है कि यदि मूल्यांकन में कोई गलती हुई है, तो उसे सुधारकर संशोधित परिणाम जारी किए जाने चाहिए।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कई विद्यार्थी एक या दो अंकों से फेल हो रहे हैं। इससे उनका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने की आशंका है। छात्रों ने विश्वविद्यालय से मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा करने और विद्यार्थियों की शिकायतों का उचित समाधान करने की मांग की।
ईयर बैक नियम खत्म करने और क्लियरेंस एग्जाम की मांग
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने ईयर बैक नियम समाप्त करने और स्नातक विद्यार्थियों के लिए क्लियरेंस एग्जाम की व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा पुनर्मूल्यांकन शुल्क में राहत देने और ग्रेस मार्क्स के नियमों में छात्रहित के अनुसार बदलाव करने की मांग की गई।
NSUI का कहना है कि परीक्षा परिणामों और उपस्थिति से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक होने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। छात्रों ने परीक्षा मूल्यांकन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
नारों के जरिए जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय की परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान “एक कचौड़ी, दो समोसा, IGKV फैकल्टी का क्या भरोसा!” जैसे नारे लगाए गए।
छात्रों ने कहा कि कथित मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ियों और सख्त ईयर बैक नियम के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार करने और समयबद्ध कार्रवाई करने की अपील की।
कुलपति को 15 दिन का अल्टीमेटम
NSUI के मुताबिक, छात्र प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर परीक्षा परिणामों की दोबारा जांच, ईयर बैक नियम में बदलाव और परीक्षा से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने सहित विभिन्न मांगें रखीं। संगठन ने इन मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
NSUI ने चेतावनी दी है कि तय समय में मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जा सकता है। फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन मांगों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर विद्यार्थियों की नजर बनी हुई है।
