Headlines

फिल्म बनाते समय अवॉर्ड का ख्याल नहीं आना चाहिए,बोलीं- ‘कर्म करो,फल की चिंता मत करो’

दुपहिया 2 में पुष्पलता के किरदार में अभिनेत्री रेणुका शहाणे रेणुका शहाणे का फिल्ममेकिंग और दुपहिया 2 पर बयान

अभिनेत्री और निर्देशिका रेणुका शहाणे का मानना है कि फिल्म या कंटेंट बनाते समय सबसे जरूरी उसकी कहानी और विश्वसनीयता है। उनका कहना है कि किसी फिल्म को इस सोच के साथ नहीं बनाया जाना चाहिए कि उसे अवॉर्ड मिलेगा या नहीं। हाल ही में अमेजन प्राइम वीडियो की सीरीज ‘दुपहिया 2’ में पुष्पलता के किरदार में नजर आईं रेणुका ने फिल्ममेकिंग, मराठी सिनेमा और अपने किरदार को लेकर खुलकर बात की।

फिल्म बनाते समय अवॉर्ड का ख्याल नहीं होना चाहिए

रेणुका शहाणे के मुताबिक, किसी फिल्म को बनाने के पीछे एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए और कहानी विश्वसनीय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिल्म बनाते समय अवॉर्ड मिलने की कल्पना नहीं करनी चाहिए।

उनके शब्दों में, “कर्म करो, फल की चिंता मत करो।” उनका मानना है कि कलाकार और फिल्ममेकर को उस कहानी पर भरोसा होना चाहिए जिसे वह दर्शकों के सामने पेश करना चाहता है।

दर्शकों की पसंद के हिसाब से जबरन बदलाव ठीक नहीं

रेणुका ने कहा कि अगर सिर्फ यह सोचकर कहानी में गाना या एक्शन सीन जोड़ा जाए कि दर्शकों को वह पसंद आएगा, तो इससे फिल्म का मूल स्वरूप प्रभावित हो सकता है।

उनके अनुसार, कंटेंट बनाते समय सबसे पहले फिल्ममेकर का खुद उस कहानी से जुड़ना जरूरी है। अगर कहानी बनाने वाला खुद उससे खुश है और उस पर विश्वास करता है, तो दर्शकों से जुड़ने की संभावना भी बेहतर होती है।

ऑस्कर में पहुंची मराठी फिल्म ‘गोंधळ’ पर भी प्रतिक्रिया

मराठी सिनेमा से जुड़े अपने अनुभव को साझा करते हुए रेणुका ने ‘गोंधळ’ के 99वें अकादमी अवॉर्ड्स के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने पर भी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने इसे मराठी फिल्म इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक, जब किसी क्षेत्रीय फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है, तो पूरी इंडस्ट्री की ओर लोगों का ध्यान जाता है और फिल्ममेकर्स में बेहतर काम करने का उत्साह बढ़ता है।

‘दुपहिया 2’ में पुष्पलता का किरदार चुनौतीपूर्ण

अमेजन प्राइम वीडियो की ‘दुपहिया 2’ में रेणुका शहाणे एक गांव की सरपंच पुष्पलता की भूमिका निभा रही हैं। किरदार के बारे में उन्होंने बताया कि पुष्पलता पढ़ी-लिखी नहीं है और उसे अपने हस्ताक्षर तक करना नहीं आता।

रेणुका के मुताबिक, इस किरदार को निभाते समय उन्हें अपनी पढ़ाई या वास्तविक जीवन की पृष्ठभूमि को भूलने की जरूरत नहीं थी, बल्कि किरदार की सोच और परिस्थितियों पर विश्वास करना जरूरी था।

पहली बार निभाया गांव की महिला का किरदार

रेणुका ने बताया कि अब तक उन्होंने ज्यादातर शहरी महिलाओं के किरदार निभाए हैं। इसलिए पुष्पलता की भूमिका उनके लिए अलग अनुभव थी।

उन्होंने कहा कि जब यह किरदार उनके पास आया तो उन्हें यह जानने की उत्सुकता थी कि वह इसे किस तरह निभा पाएंगी। पुष्पलता का डर, उसका राजनीतिक माहौल और लोगों द्वारा उसे गंभीरता से न लेने की चिंता उनके वास्तविक जीवन से काफी अलग है| रेणुका के मुताबिक, दर्शकों ने इस भूमिका को पसंद किया, जिससे उन्हें खुशी हुई।

निर्देशन में अपनी बात कहने की आजादी

निर्देशन और अभिनय में कहानियों के चुनाव को लेकर रेणुका ने कहा कि दोनों प्रक्रियाएं उनके लिए अलग हैं। निर्देशक के तौर पर उन्हें अपनी कहानी पर अधिक अधिकार महसूस होता है और वह अपनी फिल्मों के जरिए उन बातों को कहने की कोशिश करती हैं, जिन्हें वह दर्शकों तक पहुंचाना चाहती हैं।

वहीं, अभिनय के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें कई बार कहानी कलाकार को चुनती है। उनके अनुसार, उन्हें मिलने वाले किरदार और कहानियां भी यह संकेत देते हैं कि उन्हें किस तरह की भूमिकाएं पसंद हैं।

रेणुका का मानना है कि उनकी सोच और व्यक्तित्व की झलक सिर्फ उन भूमिकाओं में नहीं दिखती जो उन्हें ऑफर होती हैं, बल्कि खास तौर पर उन कहानियों में नजर आती है जिन्हें वह खुद बनाना चाहती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *