Headlines

आज का पंचांग 3 अक्टूबर 2026 सप्तमी के बाद अष्टमी, जानें राहुकाल

3 अक्टूबर 2026 के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और अष्टमी श्राद्ध की जानकारी 3 अक्टूबर 2026 आज का पंचांग और अष्टमी श्राद्ध

आज 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज आश्विन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 7:59 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। आज अष्टमी श्राद्ध और महालक्ष्मी व्रत की समाप्ति का उल्लेख किया गया है।

आज का पंचांग

  • दिन: शनिवार
  • विक्रम संवत: 2083
  • शक संवत: 1948
  • अयन: दक्षिणायन
  • ऋतु: शरद
  • मास: आश्विन
  • पक्ष: कृष्ण
  • तिथि: सप्तमी सुबह 7:59 बजे तक, इसके बाद अष्टमी
  • नक्षत्र: आर्द्रा, 4 अक्टूबर रात 1:29 बजे तक; इसके बाद पुनर्वसु
  • योग: वरीयान शाम 3:21 बजे तक, फिर परिघ
  • सूर्योदय: सुबह 6:31 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 6:23 बजे
  • राहुकाल: सुबह 9:29 से 10:58 बजे तक
  • दिशाशूल: पूर्व दिशा

अष्टमी श्राद्ध और महालक्ष्मी व्रत

आज के व्रत-पर्व विवरण में अष्टमी श्राद्ध का उल्लेख है। साथ ही महालक्ष्मी व्रत की समाप्ति भी बताई गई है। श्राद्ध पक्ष से जुड़ी परंपराओं में पितरों के निमित्त जल अर्पण और श्रद्धापूर्वक कर्म करने का महत्व बताया गया है।

सप्तमी को ताड़ का फल खाने को लेकर धार्मिक मान्यता

पंचांग में ब्रह्मवैवर्त पुराण के संदर्भ से सप्तमी तिथि पर ताड़ का फल खाने को लेकर एक धार्मिक मान्यता दी गई है। इसमें इसे स्वास्थ्य और शरीर से जुड़े नकारात्मक परिणामों से जोड़ा गया है। यह धार्मिक ग्रंथ में वर्णित मान्यता है, वैज्ञानिक चिकित्सा सलाह नहीं।

इसी तरह स्कंद पुराण के संदर्भ से चतुर्मास में तांबे और कांसे के पात्रों के बजाय अन्य धातुओं के पात्र इस्तेमाल करने तथा पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करने से जुड़े धार्मिक उल्लेख दिए गए हैं।

4 अक्टूबर को रविपुष्यामृत योग

पंचांग सामग्री के अनुसार 4 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि 12:13 बजे से 5 अक्टूबर सूर्योदय तक रविपुष्यामृत योग रहेगा। पुष्य नक्षत्र से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में इसे शुभ और सिद्धिदायक माना जाता है।

पंचांग में दी गई मान्यता के अनुसार इस दौरान जप, ध्यान, दान और पुण्य कर्म को विशेष फलदायी माना गया है। वहीं विवाह और उससे जुड़े मांगलिक कार्यों को पुष्य नक्षत्र में वर्जित बताए जाने का उल्लेख शिव पुराण के संदर्भ से किया गया है।

श्राद्धकर्म को लेकर क्या कहा गया है

धार्मिक परंपरा में श्राद्धकर्म के लिए धन या सामग्री उपलब्ध न होने की स्थिति में भी श्रद्धा से पितरों का स्मरण करने का उल्लेख मिलता है। पंचांग में विष्णु पुराण और वराह पुराण के संदर्भ से बताया गया है कि आर्थिक असमर्थता की स्थिति में तिल मिश्रित जल से पितरों को जलांजलि दी जा सकती है।

यदि यह भी संभव न हो तो गौ को चारा खिलाने या श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करने की परंपरा का उल्लेख किया गया है। इसका मूल भाव यह है कि श्राद्धकर्म में श्रद्धा और भक्ति को महत्वपूर्ण माना गया है।

बरगद के पत्ते पर स्वस्तिक बनाने की मान्यता

पंचांग में दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने से जुड़ी एक लोकमान्यता भी दी गई है। इसके अनुसार गुरु पुष्य या रवि पुष्य योग में बरगद के पत्ते पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखने की बात कही गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *