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बारिश की कमी से बढ़ा सूखे का खतरा ,11 जिलों पर सूखे का संकट

मध्य प्रदेश में कम बारिश से सूखे की स्थिति और किसानों के प्रदर्शन की तस्वीर MP में सूखे का संकट, 11 जिले प्रभावित

मध्य प्रदेश में इस मानसून कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 11 जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं। इनमें इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर जैसे जिले शामिल हैं। सबसे ज्यादा बारिश की कमी आलीराजपुर में दर्ज की गई है, जहां सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

कम बारिश का असर खरीफ फसलों पर पड़ने के साथ आने वाले रबी सीजन की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है।

पांढुर्णा में किसानों ने रोका CM का काफिला

कम बारिश और फसल नुकसान से नाराज किसानों ने 4 अक्टूबर को पांढुर्णा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला रोक दिया। किसानों ने हाथों में सूखी फसलें लेकर कृषि कर्ज माफी और जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग रखी।

मुख्यमंत्री ने वाहन से उतरकर किसानों की समस्याएं सुनीं। किसानों के मुताबिक, कम बारिश के कारण सोयाबीन, मक्का और मूंग जैसी खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है।

नौ जिले सूखे के पैमाने के करीब

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 11 जिलों में से नौ जिले ऐसे हैं जो सामान्य से 26 प्रतिशत या उससे अधिक कम बारिश होने वाले सूखे के पैमाने के दायरे में बताए जा रहे हैं। इनमें इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

वहीं शाजापुर और पांढुर्णा में सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत का अंतर बताया गया है।

2015 के बाद फिर गंभीर स्थिति

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, किसी जिले में सामान्य से 26 प्रतिशत कम बारिश होने पर उसे सूखाग्रस्त स्थिति के पैमाने पर माना जाता है। इस साल मालवा-निमाड़ के साथ नर्मदापुरम संभाग में भी बारिश की कमी दर्ज की गई है।

स्रोत के अनुसार, 2015 के बाद 2026 में ऐसे गंभीर हालात देखने को मिल रहे हैं। हालांकि 2017 और 2018 में भी बारिश कम हुई थी, लेकिन इस बार छिटपुट बारिश और प्रदेश स्तर पर करीब 4 प्रतिशत की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

मौसम विभाग का अनुमान

स्रोत में बताया गया है कि मौसम विभाग ने पहले ही प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 90 से 95 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया था। इस बार 25 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जबकि 30 जिलों में बारिश औसत से नीचे रही।

अभी सूखा घोषित नहीं हुआ

किसी जिले को केवल बारिश की कमी के आधार पर सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जाता। इसके लिए फसल की स्थिति, बोवनी का क्षेत्रफल, मिट्टी में नमी, भूजल स्तर और जलाशयों में पानी की उपलब्धता जैसे कई मानकों का आकलन किया जाता है।

इसके लिए जिलों में गिरदावरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे कलेक्टरों के माध्यम से राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भेजा जाएगा। इसके बाद शासन स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

नियमों के अनुसार, खरीफ सीजन के लिए सूखा घोषित करने की समय सीमा 31 अक्टूबर बताई गई है। इसलिए आने वाले दिनों में फसल और जलस्रोतों की स्थिति के आकलन के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन जिलों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है।

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