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कुत्ते की मौत के बाद ट्रक चालक पर हमला, जंगल में भागकर बचाई जान

सतना के मझगवां क्षेत्र में कुत्ते की मौत के बाद ट्रक चालक से कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी खबर की प्रतीकात्मक तस्वीर सतना में ट्रक चालक से मारपीट का आरोप, मझगवां पुलिस की भूमिका पर सवाल
मध्य प्रदेश के सतना जिले में ट्रक के नीचे आने से एक आवारा कुत्ते की मौत के बाद चालक के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। ट्रक चालक रंजीत विश्वकर्मा का आरोप है कि दो चारपहिया वाहनों में सवार कुछ हथियारबंद लोगों ने उनका पीछा किया और बंदूक की बट से हमला किया। जान बचाने के लिए चालक ट्रक छोड़कर जंगल की ओर भागे और डायल 112 पर फोन कर मदद मांगी।

चालक ने मझगवां थाना पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें थाने ले गई, लेकिन करीब 24 घंटे तक न तो चिकित्सकीय जांच (एमएलसी) कराई गई और न ही उचित उपचार की व्यवस्था हुई। फिलहाल, घटना से जुड़े आरोपों और पुलिस की कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

कुत्ते की मौत के बाद ट्रक का पीछा करने का आरोप

जानकारी के अनुसार, रंजीत विश्वकर्मा अमानगंज से क्लिंकर लोड कर ट्रक से शंकरगढ़ स्थित पावर प्लांट जा रहे थे। रास्ते में ट्रक के नीचे एक आवारा कुत्ता आ गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

चालक के मुताबिक, इसके बाद दो चारपहिया वाहनों में सवार कुछ लोगों ने ट्रक का पीछा किया। आरोप है कि ट्रक रुकवाने के बाद लोगों ने चालक के साथ मारपीट की और बंदूक की बट से हमला किया।

अचानक हुए हमले से घबराए चालक ने अपनी जान बचाने के लिए ट्रक राजमार्ग पर छोड़ दिया और जंगल की ओर भाग गए। वहां से उन्होंने डायल 112 पर संपर्क कर पुलिस से मदद मांगी।

डायल 112 पर मदद मांगने के बाद थाने ले गई पुलिस

चालक के अनुसार, सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद वह वापस ट्रक के पास आए और पुलिस उन्हें वाहन सहित मझगवां थाने ले गई।

चालक ने आरोप लगाया कि कथित मारपीट के बावजूद उनकी चिकित्सकीय जांच और उपचार की व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें लंबे समय तक थाने में बैठाए रखा गया।

यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामले में पुलिस की प्रतिक्रिया और घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी।

पहले ट्रक खड़ा करने पर कार्रवाई की बात

मझगवां थाना प्रभारी आदित्य नारायण धुर्वे के हवाले से बताया गया है कि पहले राजमार्ग पर ट्रक खड़ा करने के मामले में चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मारपीट के आरोपों की स्थिति देखी जाएगी।

वहीं, ग्रामीण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेम लाल कुर्वे ने मामले की जानकारी लेकर जवाब देने की बात कही है।

अधिकारियों के इन बयानों के बाद अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि चालक की शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई, मेडिकल परीक्षण कराया गया या नहीं और कथित हमले में शामिल लोगों की पहचान की गई है या नहीं।

पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

इस घटना में मुख्य सवाल यह है कि यदि चालक ने मारपीट की शिकायत की थी, तो उनकी चिकित्सकीय जांच और उपचार की व्यवस्था कब की गई। इसके साथ ही कथित हमलावरों के खिलाफ शिकायत पर क्या कदम उठाए गए, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।

राजमार्ग पर ट्रक खड़ा करने को लेकर नियमों के तहत कार्रवाई का सवाल अलग है, जबकि मारपीट के आरोपों की जांच और घायल व्यक्ति को चिकित्सा सहायता देना अलग विषय है। दोनों मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने से घटना की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

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