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मानसिक रूप से दिव्यांग युवती से दुष्कर्म के दोषी को 15 साल की सजा

बालाघाट में मानसिक रूप से दिव्यांग युवती से दुष्कर्म के मामले में सत्र न्यायालय द्वारा दोषी को 15 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने की खबर। बालाघाट में मानसिक रूप से दिव्यांग युवती से दुष्कर्म के मामले में सत्र न्यायालय द्वारा दोषी को 15 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने की खबर।
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में मानसिक रूप से दिव्यांग 22 वर्षीय युवती से दुष्कर्म के मामले में सत्र न्यायालय ने दोषी को 15 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ ही पीड़िता को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अनुशंसा की गई है।

नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, सत्र न्यायाधीश प्राणेश कुमार प्राण की अदालत ने ग्राम घोटी, थाना लांजी निवासी 38 वर्षीय अम्बर लाल पिता हगरू लाल जामुरे को मामले में दोषी ठहराया।

घर में अकेली थी युवती, तभी हुई घटना

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 23 दिसंबर 2024 की है। दोपहर करीब 4 बजे युवती अपने घर में अकेली थी। इसी दौरान आरोपी घर में घुसा और उसके साथ दुष्कर्म किया।

पीड़िता मानसिक रूप से दिव्यांग है और ठीक से बोल नहीं पाती। घटना की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया

लांजी पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 332 और 64(2)(के) के तहत मामला दर्ज किया गया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में अभियोग पत्र पेश किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और परिस्थितियों के आधार पर आरोप साबित किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एमएम द्विवेदी ने पैरवी की।

पीड़िता को 5 लाख रुपये मुआवजा देने की अनुशंसा

अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए पीड़िता को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने की अनुशंसा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से की है।

यह अनुशंसा यौन उत्पीड़न एवं अन्य अपराधों की पीड़िताओं के लिए प्रतिकर योजना, 2018 के तहत की गई है। आर्थिक सहायता का उद्देश्य पीड़िता को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना है।

अदालत के फैसले से पीड़िता को न्याय की दिशा में राहत

इस मामले में अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के आधार पर दोषी को सजा सुनाई है। साथ ही पीड़िता के लिए आर्थिक सहायता की अनुशंसा भी की गई है। मामले का फैसला दिव्यांग महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कानूनी कार्रवाई और पीड़ित सहायता की अहमियत को रेखांकित करता है।

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