6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इस दिन इंदिरा एकादशी और एकादशी श्राद्ध का पर्व मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि रात 12:34 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी। अश्लेषा नक्षत्र रात 10:17 बजे तक रहेगा, फिर मघा नक्षत्र आरंभ होगा।
6 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- दिन: मंगलवार
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद
- मास: आश्विन
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: एकादशी, रात 12:34 बजे तक; इसके बाद द्वादशी
- नक्षत्र: अश्लेषा, रात 10:17 बजे तक; इसके बाद मघा
- योग: सिद्ध, सुबह 7:20 बजे तक; इसके बाद साध्य
- दिशाशूल: उत्तर दिशा
आज इंदिरा एकादशी
6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। यह एकादशी पितृ पक्ष में पड़ती है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं में इसका संबंध पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों से भी माना जाता है। इसी दिन एकादशी श्राद्ध भी है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत, पूजा, विष्णु मंत्रों का जाप और पितरों का स्मरण करने की परंपरा है। इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था और परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आज का राहुकाल
दिए गए पंचांग के अनुसार 6 अक्टूबर को राहुकाल शाम 3:24 बजे से 4:53 बजे तक रहेगा। राहुकाल को ज्योतिषीय परंपरा में शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि राहुकाल का समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में भी इसके समय में अंतर दिखाई देता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 6:32 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:21 बजे
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय शहर और स्थान के अनुसार बदल सकता है।
एकादशी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
पंचांग में दी गई मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु सहस्रनाम के पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अलावा इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार भोजन संबंधी नियमों का पालन करते हैं।
स्रोत में एकादशी के दिन बाल न कटवाने, चावल और साबूदाना आदि से परहेज करने जैसी मान्यताओं का भी उल्लेख है। ये धार्मिक परंपराएं हैं और अलग-अलग संप्रदायों या परिवारों में इनके पालन के तरीके अलग हो सकते हैं।
आज का विशेष पर्व
इंदिरा एकादशी और एकादशी श्राद्ध आज के प्रमुख धार्मिक अवसर हैं। पितृ पक्ष के दौरान आने वाली इस एकादशी को श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना के साथ पितरों का स्मरण और अपनी परंपरा के अनुसार श्राद्ध संबंधी कर्म करते हैं।
